मसूरी: पहाड़ों की रानी

 


धुंध के आँचल में सिमटी, ये रानी कितनी सुहानी,

हर मोड़ पे ठहर जाए दिल, जैसे हो कोई कहानी।

देवदार की खुशबू में लिपटी, सुबहें चाँदी सी लगतीं,

सूरज की पहली किरणों से, घाटियाँ सुनहरी जगतीं।


कैमल्स बैक की राहों पर, यादों का कारवाँ चलता,

हर कदम पर मुस्कुराता, मौसम भी यहाँ बदलता।

लाल टिब्बा की ऊँचाई से, दिखता सपना सुनहरा,

बादलों संग खेलता शहर, लगता जैसे बसेरा स्वर्ग का चेहरा।


मॉल रोड की चहल-पहल में, जीवन गुनगुनाता है,

कॉफी की चुस्की संग कोई, दिल का किस्सा सुनाता है।

रात ढले जब रोशनी, पहाड़ों पे झिलमिल करती,

जैसे तारों ने धरती पर, अपनी पायल धर दी हँसती।


जहाँ झरनों की सरगम में, प्रकृति गीत सुनाती है,

ठंडी बयार के झोंकों में, हर थकान मिट जाती है।

मसूरी की इन वादियों में, सपने रंग सजाते हैं,

जो एक बार यहाँ आ जाए — दिल यहीं बस जाते हैं।  


                                             – मीनाक्षी सिंह 


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