गोवा: सागर, संस्कृति और स्मृतियों का संगम
हर लहर में संगीत का संदेश।
कलंगुट की चहल–पहल भरी राहें,
बागा की रातें, सपनों सी बाहें।
मोरजिम का सन्नाटा, अरम्बोल की शांति,
हर तट पे बिखरी है जीवन की भ्रांति।
डोना पाउला का जादू, मिरामार की कहानी,
लहरों संग बहती है स्मृतियों की रवानी।
पणजी की गलियाँ, फोंटेनहास का रंग,
पुर्तग़ाली छाया, इतिहास का संग।
ओल्ड गोवा के गिरजाघर महान,
बोम जीसस, से कैथेड्रल का सम्मान।
फिश करी–राइस की स्वादिष्ट थाली,
फेणी की महक और कोकुम की प्याली।
त्योहारों में झूमता है पूरा नगर,
संगीत, नृत्य, और मित्रों का सागर।
गोवा है केवल एक जगह नहीं,
यह आत्मा की अनकही दुआ है कहीं।
सागर, संस्कृति और प्रेम का संगम,
भारत का छोटा यूरोप—अनंत आलम।
— मीनाक्षी सिंह

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