शिमला की वादियाँ


शिमला की वादियाँ, सपनों का संसार,
देवदार की खुशबू, ठंडी बयार।

धूप जब छू ले टेढ़े पहाड़,

बर्फ़ से ढक जाए सारा नज़ार।


रिज की सैर में भीड़ का रंग,

घोड़े की टापों में झूमता ढंग।

कूफ़री की राहों में झरनों की बात,

हर मोड़ पे बसी है यादों की सौगात।


मॉल रोड पे मुस्कानें खिलतीं,

कुल्लू शॉल की दुकानों से मिलतीं।

कॉफी की चुस्की, हिम की छाँव,

दिल को करे ये ठहराव का गाँव।


टॉय ट्रेन की सीटी गूँजे सवेरे,

पटरी पे सपने दौड़ें घेरे।

बरोग, सोलन, सुरंगों के बीच,

हर दृश्य में छिपा है कविता का खींच।


क्राइस्ट चर्च की घंटियाँ बजे,

शाम की ठंडक दिल को सजे।

शिमला की वादियाँ कहती हैं प्यार,

“रुको ज़रा, यहाँ है सुकून अपार।” 


                              — मीनाक्षी सिंह 

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