त्रिपुरा: पूर्वोत्तर की रानी
हरी-भरी वादियों में बसी त्रिपुरा की कहानी,
जहाँ पहाड़ों की गोद में खिलती है मुस्कान पुरानी।
नीले आसमां तले नाचते हैं बादल रेशमी,
जंगलों में गूँजती बांसुरी — धुनें मधुर, देशी।
उज्जयंत महल की दीवारें कहतीं राजसी बात,
इतिहास की खुशबू लिए हर पत्थर है सौगात।
नीरमहल झील के बीच जैसे स्वप्न सजीव हुआ,
जल में झिलमिल करता सूरज — सौंदर्य कभी न क्षीण हुआ।
माताबारी मंदिर में जब दीपक झिलमिलाते हैं,
भक्ति के सुर में मनुष्य और देवता संग गाते हैं।
अगर्तला की गलियों में संस्कृति की लहरें बहतीं,
हर त्योहार में त्रिपुरा की आत्मा फिर से रहती।
जहाँ जनजातीय नृत्यों में झूमती धरती सुहानी,
रंग-बिरंगे वस्त्रों में सजी हर दिलकश कहानी।
प्रकृति की गोद में बसा यह प्रेम का ठिकाना,
त्रिपुरा — पूर्वोत्तर की रानी, सदा रहे मन को भाना।
— मीनाक्षी सिंह

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