स्वर्णनगरी जैसलमेर


स्वर्ण रेत की चादर ओढ़े,
रेगिस्तान की रानी,

धूप में जैसे झिलमिल सोना,

जैसलमेर कहानी।


बादल छूते प्राचीरों को,

किले सुनाते गाथा,

राजपुताना शौर्य की,

हर ईंट बने परिभाषा।


पवन चक्की, ऊँट की चाल,

धीमे स्वर में बोले,

थार की लहराती रेतों पर,

सपनों के दीपक डोले।


पाताल तोरण, हवेलियाँ,

झरोखों की मुस्कान,

शिल्पकार की अद्भुत कलम से,

गूंजे सौंदर्य गान।


गोधूलि में तनहा राहें,

जब सूरज ढल जाता,

स्वर्ण कणों में रंग भरे,

आसमान सज जाता।


हर कोना इतिहास सुनाए,

हर पत्थर गीत सुनाए,

जैसलमेर का स्वर्ण हृदय,

भारत को गौरव दिलाए।


                    — मीनाक्षी सिंह 

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