अमृतसर: सेवा, शौर्य और श्रद्धा की धरती
जहाँ हर दिल में है सेवा का स्वर।
हरमंदिर साहिब की झिलमिल झील,
श्रद्धा में डूबे मन पाते हैं सुकून का सिल।
सरसों के खेतों की हरियाली,
पंजाब की मिट्टी की है निराली।
लंगर की थाली, प्रेम का स्वाद,
बराबरी का संदेश, जहाँ मिलता बारंबार।
जलियाँवाला बाग की माटी,
संग लिए है बलिदानों की कथा थाती।
आँसू, रक्त और वीरों की पुकार,
आज भी गूंजे वहाँ हर एक दीवार।
वाघा सीमा पर तिरंगे की शान,
गूँजता है भारत का महान गान।
वीरों की धरती, साहस की लहर,
अमृतसर है भारत का गौरव अमर।
सिख धर्म का सरल संदेश,
सेवा, करुणा और सच्चा परिवेश।
“नानक नाम चढ़दी कला,” की रीत,
युगों–युगों तक जग में जगमगाती प्रीत।
— मीनाक्षी सिंह

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