कन्याकुमारी: तीन सागरों का संगम


दक्षिण की गोद में बसी, सागर की रानी,

लहरों की लोरी, हवा की कहानी।

जहाँ सूरज उगता है सोने-सा निखरकर,

और ढलता है रंगों में घुलकर।


तीनों सागर का संगम जहाँ,

अरब, बंगाल और हिंद का जहाँ,

एक लय में गाते हैं गीत,

भारत का यह अनुपम संगीत।


विवेकानंद की चट्टान पर खड़ा,

एक संन्यासी, स्वप्नों का धरा।

ध्यान में डूबा, दृष्टि में ज्योति,

भारत के मन की यही तो होती।


मंदिर में देवी की ज्योति प्रखर,

कन्या रूप में शक्ति अमर।

शंख की ध्वनि, दीपों की शृंखला,

भक्ति में डूबे मन के कण-कण।


सांझ के रंग जब लहरों पर झरते,

आकाश और जल एक-दूजे में भरते,

तब लगता है — यह भूमि नहीं,

स्वयं ईश्वर का स्पंदन यहीं।


                   — मीनाक्षी सिंह 

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