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Showing posts from October, 2025

Titanic Song

त्रिपुरा: पूर्वोत्तर की रानी

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  हरी-भरी वादियों में बसी त्रिपुरा की कहानी, जहाँ पहाड़ों की गोद में खिलती है मुस्कान पुरानी। नीले आसमां तले नाचते हैं बादल रेशमी, जंगलों में गूँजती बांसुरी — धुनें मधुर, देशी। उज्जयंत महल की दीवारें कहतीं राजसी बात, इतिहास की खुशबू लिए हर पत्थर है सौगात। नीरमहल झील के बीच जैसे स्वप्न सजीव हुआ, जल में झिलमिल करता सूरज — सौंदर्य कभी न क्षीण हुआ। माताबारी मंदिर में जब दीपक झिलमिलाते हैं, भक्ति के सुर में मनुष्य और देवता संग गाते हैं। अगर्तला की गलियों में संस्कृति की लहरें बहतीं, हर त्योहार में त्रिपुरा की आत्मा फिर से रहती। जहाँ जनजातीय नृत्यों में झूमती धरती सुहानी, रंग-बिरंगे वस्त्रों में सजी हर दिलकश कहानी। प्रकृति की गोद में बसा यह प्रेम का ठिकाना, त्रिपुरा — पूर्वोत्तर की रानी, सदा रहे मन को भाना।                                        — मीनाक्षी सिंह 

कन्याकुमारी: तीन सागरों का संगम

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दक्षिण की गोद में बसी, सागर की रानी, लहरों की लोरी, हवा की कहानी। जहाँ सूरज उगता है सोने-सा निखरकर, और ढलता है रंगों में घुलकर। तीनों सागर का संगम जहाँ, अरब, बंगाल और हिंद का जहाँ, एक लय में गाते हैं गीत, भारत का यह अनुपम संगीत। विवेकानंद की चट्टान पर खड़ा, एक संन्यासी, स्वप्नों का धरा। ध्यान में डूबा, दृष्टि में ज्योति, भारत के मन की यही तो होती। मंदिर में देवी की ज्योति प्रखर, कन्या रूप में शक्ति अमर। शंख की ध्वनि, दीपों की शृंखला, भक्ति में डूबे मन के कण-कण। सांझ के रंग जब लहरों पर झरते, आकाश और जल एक-दूजे में भरते, तब लगता है — यह भूमि नहीं, स्वयं ईश्वर का स्पंदन यहीं।                      — मीनाक्षी सिंह 

मसूरी: पहाड़ों की रानी

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  धुंध के आँचल में सिमटी, ये रानी कितनी सुहानी, हर मोड़ पे ठहर जाए दिल, जैसे हो कोई कहानी। देवदार की खुशबू में लिपटी, सुबहें चाँदी सी लगतीं, सूरज की पहली किरणों से, घाटियाँ सुनहरी जगतीं। कैमल्स बैक की राहों पर, यादों का कारवाँ चलता, हर कदम पर मुस्कुराता, मौसम भी यहाँ बदलता। लाल टिब्बा की ऊँचाई से, दिखता सपना सुनहरा, बादलों संग खेलता शहर, लगता जैसे बसेरा स्वर्ग का चेहरा। मॉल रोड की चहल-पहल में, जीवन गुनगुनाता है, कॉफी की चुस्की संग कोई, दिल का किस्सा सुनाता है। रात ढले जब रोशनी, पहाड़ों पे झिलमिल करती, जैसे तारों ने धरती पर, अपनी पायल धर दी हँसती। जहाँ झरनों की सरगम में, प्रकृति गीत सुनाती है, ठंडी बयार के झोंकों में, हर थकान मिट जाती है। मसूरी की इन वादियों में, सपने रंग सजाते हैं, जो एक बार यहाँ आ जाए — दिल यहीं बस जाते हैं।                                                  – मीनाक्षी सिंह 

दार्जिलिंग: धुंध में लिपटा स्वर्ग

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हरे पहाड़ों की गोद में बसा, एक सपना सुहाना, जहाँ बादल करते शरारत, छू जाते हर ठिकाना। सर्द हवाओं की फुसफुस में, कोई राग सुनाई देता, चाय की खुशबू में घुला, प्रकृति का मधुर गीत बहता। टॉय ट्रेन की सीटी बोले, जैसे कोई बाल कहानी, घुमावदार पटरियों पर चलती, मुस्कान लिए रवानी। नीले आसमान के नीचे, सूरज छूता हिमालय, जहाँ हर सुबह लाती है, मन में नया उजियालय। कंचनजंघा की चोटी पर, सुनहरी किरणें उतरें, धरती जैसे पूज रही हो, नभ के पवित्र सवेरे। मठों में बजती घंटियाँ, गूँजें शांति के सुर प्यारे, मन को सिखाएँ मौन की भाषा, जीवन के सहारे। रात ढले जब दीप झिलमिल, तारों से हो संवाद, धुंध के आँचल में छिपे, सपनों की मिले फरियाद। हर पगडंडी कहती कहानी, सादगी की मिसाल, दार्जिलिंग — वो ठौर जहाँ, ठहर जाए हर ख्याल।                                          – मीनाक्षी सिंह 

नीला नगर: जोधपुर

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मरुस्थल की गोद में बसा, एक सपना नीला, प्यारा, जहाँ हवा में रेत घुले, सूरज भी मुस्काए सारा। नीली दीवारों के पीछे, इतिहास की गूँज सुहानी, हर मोड़ पे गाता कोई, राजाओं की अमर कहानी। मेहरानगढ़ की ऊँची चोटी, बोले शौर्य और अभिमान, जहाँ तलवारें सो गईं, पर जिंदा है सम्मान। किले की दीवारों पर सूरज, बिखराए केसरिया रंग, हर पत्थर में गूँज उठे, रणभेरी के दृढ़ स्वर संग। घंटाघर की चहल-पहल में, महके मसालों की बात, सदियों पुरानी गलियों में, गूँजे हँसी की सौगात। जसवंत थड़ा का सन्नाटा, जैसे कविता कोई अधूरी, पत्थरों में भी धड़कन सुनो — ये विरासत है जरूरी। उमैद भवन के आँगन में, झलके राजसी रवानी, जहाँ समय भी ठहर गया, देख उसकी नादानी। नीला नगर जोधपुर मेरा, सूरज की शान निराली, धूप में नहाया इतिहास, रेत में झिलमिल लाली। नीली छतों से झाँकें सपने, जैसे नभ उतर आए, हर संध्या घुल जाए मन में, जब दीपक घर-घर जल जाए। यह शहर नहीं, एक राग है — प्रेम, गौरव और श्रृंगार, जोधपुर की मिट्टी में बसता, भारत का आत्मा-संसार।                              ...

स्वर्णनगरी जैसलमेर

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स्वर्ण रेत की चादर ओढ़े, रेगिस्तान की रानी, धूप में जैसे झिलमिल सोना, जैसलमेर कहानी। बादल छूते प्राचीरों को, किले सुनाते गाथा, राजपुताना शौर्य की, हर ईंट बने परिभाषा। पवन चक्की, ऊँट की चाल, धीमे स्वर में बोले, थार की लहराती रेतों पर, सपनों के दीपक डोले। पाताल तोरण, हवेलियाँ, झरोखों की मुस्कान, शिल्पकार की अद्भुत कलम से, गूंजे सौंदर्य गान। गोधूलि में तनहा राहें, जब सूरज ढल जाता, स्वर्ण कणों में रंग भरे, आसमान सज जाता। हर कोना इतिहास सुनाए, हर पत्थर गीत सुनाए, जैसलमेर का स्वर्ण हृदय, भारत को गौरव दिलाए।                     — मीनाक्षी   सिंह 

La Navidad de los Corazones (The Christmas of the Hearts)

Act 1: La Navidad en el Corazón (Christmas in the Heart) Settings:  Madrid & Barcelona (Spain) | Lisbon (Portugal) | Paris (France) | Rome, Arezzo, Pisa & Florence (Italy)  • Mariposa Fernández, a top fashion editor at Cielo de Lujo in Madrid, juggles holiday preparations, tight deadlines at the renowned fashion magazine Elegancia Viva, and a packed social calendar filled with family obligations. • Mónico Fernández, Mariposa's mother, offers emotional support to her, grounding her with wisdom and love, especially during stressful times, while reminding her of the importance of family traditions and Christmas.  • Francisca Fernández, Mariposa's mother,  preserves and shares Spanish holiday traditions by creating and teaching classic festive desserts at La Casa de los Dulces, spreading warmth and togetherness. • Fulgencio Fernández brings playful energy and curiosity, helping lighten tense moments, exploring holiday traditions with wonder, and occasionally...