पुदुचेरी: सागर, शांति और रंग
नीले सागर के तट पर बसी, शांति की यह बस्ती,
फ्रेंच गलियों में गूँजती, समय की मधुर मस्ती।
दीवारों पर रंगों का मेल, गुलाबी, पीला, नीला,
हर मोड़ पे जैसे कहे — “जीवन है यहाँ रंगीला।”
नारियल की छाँव तले, धीमे-धीमे चलती बयार,
लहरों के संग गुनगुनाता, मन का हर एक तार।
कैफ़े की महक, कॉफ़ी की बात,
समुद्र की लय में डूबा हर रात।
ऑरोविल के वृक्षों तले, स्वप्नों की एक नगरी है,
जहाँ शांति कोई शब्द नहीं, पर साँसों में उतरी है।
सुनहरी रेत पे चलते पाँव, छोड़ें स्मृतियों के निशान,
हर सुबह यहाँ लिखती नई, जीवन की मुस्कान।
यहाँ सूरज ढले तो लगता, समय ठहर-सा जाए,
क्षितिज पे फैलती किरणें, मन को छूती जाएँ।
पुदुचेरी — सागर, शांति, और कला का संगम प्यारा,
हर दिल यहाँ बन जाता है — एक छोटा-सा किनारा।
— मीनाक्षी सिंह

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