कूर्ग: हरियाली की आत्मा
धुंध की चादर ओढ़े, सपनों सा अनमोल कूर्ग।
कॉफी की खुशबू में घुली है सुबह की बात,
हर पत्ता यहाँ गुनगुनाए प्रकृति का गीत साथ।
झरनों की हँसी बहती है पत्थरों के संग,
बादल छूते हैं पहाड़, नभ से करते हैं ढंग।
मिट्टी की सोंधी महक में बसी है कहानी,
हर राह सुनाए शांति की मीठी निशानी।
हरे-भरे जंगलों में समय ठहर सा जाए,
पक्षियों के सुरों में मन अपना घर पाए।
नदियाँ कहें रहस्य, घाटियाँ लें साँस,
कूर्ग में हर पल है प्रकृति का विश्वास।
यहाँ की हवा में है सुकून का स्पर्श,
थकन को हर ले जाए, मन करे निर्मल वर्ष।
कूर्ग—हरियाली की आत्मा, मौन का उजास,
जहाँ दिल बन जाता है, स्वयं प्रकृति का निवास।
— मीनाक्षी सिंह

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