केरल की छवि


कोच्चि की गलियों में बसी खुशबू पुरानी,

समुद्र की लहरों में झलके सपनों की कहानी।

अल्लेप्पी की नहरें, पानी में तैरते घर,

हर मोड़ पर बसी शांति, हर किनारे पर पहर।


कुमारकोम की झीलें, कमल खिले सिरहाने,

सूरज की किरणें नहाएं पानी में जाने।

तिरुवनंतपुरम की महिमा, मंदिरों की रौनक,

धर्म और संस्कृति में बंधा हर दिल का कोना।


मुन्नार की पहाड़ियों पर हरी चाय की चादर,

कोहरे में छुपा हर सूरज का नयापन, अद्भुत अहसास का स्वाद।

केरल की सुंदरता, रंगों का अनमोल मेला,

हर जगह, हर पल, बस प्रेम का ही खेला।


                                            — मीनाक्षी सिंह 




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