कोच्चि: अनकही कथाओं का शहर
जहाँ सूरज भी धीमे-धीमे उतर।
झीलों की छाँव में बसी हैं गलियाँ,
हर मोड़ पर बसी अनकही कथाएँ।
पुराने फोर्ट की दीवारों में,
गूँजती हैं सदीयों की आवाज़ें।
चायनीज़ जाल में बंधी मछलियाँ,
सागर की बाँहों में ढलती नज़ारें।
कथक और करक शैली की खुशबू,
सड़कों पर फैली मसालों की धुन।
मलयाली गीतों की मधुर तान,
हर दिल में बसाती एक अनकही जान।
सूरज की किरणें जब समुद्र से मिलती,
और हवाएँ हल्की सी कहानी सुनाती।
कोच्चि की हर धड़कन, हर नज़ारा,
जीवन को करती है मधुरता से भरपूर।
— मीनाक्षी सिंह

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