उदयपुर का मार्च, झीलों की शांति
उदयपुर की गलियों में बिखरी रोशनी,
सुनहरी धूप में चमकती हर एक छाया।
झीलों की गहराई में प्रतिबिंबित आसमान,
हर लहर में शांति का संदेश आया।
महलों की छतों पर मंद हवाएँ खेलें,
संगीत सा बहता है हर एक मोड़ पर।
बोटों की खनक, पानी में हल्की लहर,
मार्च की सुबह में बसी मधुर मुस्कान हर तरफ़।
सिर पर नीला आकाश, पैरों तले मिट्टी की महक,
बगीचों में खिली कमल की खुशबू हर दिशा में फैली।
इतिहास की कहानियाँ, हवामहल की चुप्प में,
समय की नर्म धारा, अपनी कहानी धीरे से कहती।
उदयपुर का मार्च, झीलों की शांति,
दिल में बस जाए, मन में गूंजे हर स्नेह।
हर कदम पर मिले प्रकृति का आलिंगन,
जहाँ हर क्षण लगे, जैसे जीवन में मिली नई राह।
— मीनाक्षी सिंह

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