जनवरी ऑफ जयपुर
जयपुर की जनवरी, गुलाबी सी सुबह,
कोहरे की चादर में लिपटी हर एक गली।
हवा में ठंडक, धूप में मीठी सी गर्मी,
राजमहलों की छाया में ठहरती हुई शांति।
आमेर की पहाड़ियों पर सुनहरी किरण,
जैसे इतिहास ने ओढ़ ली हो नई चूनर।
हवा महल की झरोखों से झांकती धूप,
पत्थरों पर उकेर दे सपनों की रूपरेखा।
सर्द सुबह में चाय की भाप उठे,
कुल्हड़ की गरमी से दिल भी पिघले।
बाज़ारों में रंगीन रजाइयाँ,
सर्द रातों के लिए यादों की कहानियाँ।
रातें ठिठुरतीं, तारे पास आ जाते,
जयपुर की छतों पर किस्से सुनाते।
जनवरी यहाँ मौसम नहीं, एक एहसास,
ठंड में लिपटा, पर दिल से बेहद खास।
— मीनाक्षी सिंह

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