नैनीताल: सपनों की झील


नीले आँचल में लिपटी पर्बत रानी,

झील की आँखों में झलके कहानी।

धूप की किरण जब पानी छू जाए,

सपनों की दुनिया सच बन जाए।


चीड़ की खुशबू, ठंडी हवाएँ,

मौन पेड़ों की मधुर अदाएँ।

हर राह यहाँ एक गीत सुनाए,

पहाड़ों की गोद में मन मुस्काए।


नैना देवी की शीतल छाया,

विश्वास बने हर दिल की माया।

नौकाओं का संगीत बहकाए,

लहरों पर चाँद भी मुस्काए।


रात ढले जब दीप जलें,

तारे झील में उतर चलें।

हर पल यहाँ कोई जादू बोले,

नैनीताल दिल में धीरे-धीरे खोले।

   

                       — मीनाक्षी सिंह

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