मुंबई: सपनों की नगरी


अरमानों की चादर ओढ़े, समंदर की बाँहों में,

चलती है ज़िंदगी यहाँ, सपनों की राहों में।

हर सुबह यहाँ सूरज उगता, सुनहरी उम्मीदों सा,

यह है मुंबई, दिलों का मसीहा, सितारों का बसेरा सा।


मरीन ड्राइव की ठंडी हवा, रातों को सुकून देती है,

गेटवे ऑफ इंडिया पे खड़े सपने, हर दिन कुछ कहते हैं।

हाजी अली की दुआओं में, जो मांगे वही मिल जाता है,

सिद्धिविनायक का आशीर्वाद, मन को गहराई से छू जाता है।


जुहू का किनारा, रेत पे चलती कहानियाँ बनाता है,

बांद्रा-वर्ली सी-लिंक, आसमान को ज़मीन से मिलाता है।

चोर बाज़ार की गलियों में, पुरानी यादें मिल जाती हैं,

और कालबादेवी की भीड़ में, ज़िंदगी मुस्कुराती है।


यहाँ लोकल ट्रेनें नहीं, धड़कनों की रफ़्तार चलती है,

भीड़ में भी अकेलापन, फिर भी हर शाम रंगीन लगती है।

धरती का यह टुकड़ा फ़िल्मों का जादू समेटे है,

बॉलीवुड और फ़ैशन की चमक हर दिल को छू लेती है।


मेहनत की यहाँ पूजा होती, हर सपना हकीकत बनता है,

अंधेरी से लेकर बांद्रा तक, कोई न कोई सितारा बनता है।

कैमरे की चमक, डायरेक्टर की चुप्पी,

"लाइट, कैमरा, एक्शन!" से शुरू होती है ज़िंदगी की स्क्रिप्ट सच्ची।


यह मुंबई है — भीड़ में भी जो अपना सा लगता है,

हर चेहरा एक कहानी, हर सपना सच सा झलकता है।

गिरकर फिर उठ जाना यहाँ की ही फितरत है,

शहर नहीं, एक जज़्बा है — यही तो मुंबई है।


                                           – मीनाक्षी सिंह

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