गुलाबी शहर: जयपुर


गुलाबी रंग में रंगा है, एक सपना सा नगर,

इतिहास की कहानियाँ, कहता है हर पत्थर।


आमेर का किला गूंजे, वीरता की बातों से,

हवा महल की झरोखियाँ, बोलें रानी रातों से।

नक़्क़ाशीदार दीवारों में, बहती है पुरवाई,

हर खिड़की से झाँके, रजवाड़ी परछाईं।


झील के बीच मुस्काए, जल महल का रूप,

शांत जल में सजी धरोहर, जैसे कोई स्वप्न अनूप।

नावों से छनती धूप वहाँ, कहे कहानी प्रेम की,

पानी और पत्थर मिल जाएँ, ऐसी ये धरती शेम की।


चौड़ी सड़कें, सुंदर बाज़ार, हस्तकला का मेल,

जौहरी बाज़ार में दिखता, पारंपरिक खेल।

चूड़ी, कंगन, पगड़ी, रंग — सबमें है श्रृंगार,

कला, कपड़े, गहनों से, भरता है संसार।


सांस्कृतिक रंगों की बौछार, जैसे कोई त्योहार,

लोकगीत, घूमर की छवि, करती सबका सत्कार।

जंतर-मंतर की गणनाएँ, विज्ञान का गर्व,

सिटी पैलेस की दीवारें, सजीव करें हर पर्व।


ऊँट की सवारी, रेत की बात,

जयपुर की खुशबू, बाँधे हर बात।

राजस्थानी स्वाद, दाल-बाटी की थाली,

मिट्टी में बसी है, परंपरा निराली।


जयपुर न केवल शहर है, एक जीवंत एहसास,

गुलाबी दिलों की बस्ती, सजीव इतिहास।


                            ‌‌‌ – मीनाक्षी सिंह



Comments

Popular posts from this blog

Cuori Liberi (Free Hearts)

Il Viaggio dell’Amore (The Journey of Love)

Die Symphonie der Liebe (The Symphony of Love)